हरियाणा: डिफाल्टरों के कारण संकट में फंसे बिजली निगम, 7700 करोड़ बकाया लेकिन नहीं हो पा रही वसूली

हरियाणा के बिजली निगम बिजली के बकायादारों के कारण संकट में फंसकर रह गई हैं। असल में सरकार द्वारा सरचार्ज माफी की योजना के बावजूद बिजली निगम को कोई खास लाभ नहीं हो पा रहा है।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) पर उपभोक्ताओं का बकाया जून 2025 तक बढ़कर 7,695.62 करोड़ रुपए हो गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, न केवल ग्रामीण और शहरी घरेलू उपभोक्ता बल्कि औद्योगिक इकाइयां और सरकारी विभाग भी बिल चुकाने में पीछे हैं। बिजली निगम सरकारी तंत्र से बिलों की वसूली नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है।
हरियाणा में बिजली बिल बकाएदारों को राहत देते हुए सरकार ने वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू की है। इस योजना के तहत वन टाइम बिल का भुगतान करने पर 10% की छूट और 100% सरचार्ज में छूट दी जा रही है। किश्तों में बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को 100% सरचार्ज माफ किया जाएगा। घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा औद्योगिक और अन्य उपभोक्ताओं को भी 50% सरचार्ज माफ की सुविधा दी गई है। यह योजना छह महीने तक लागू रहेगी। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली बिल बकाएदारों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

प्रदेश में 22 लाख 21 हजार 315 उपभोक्ता समय पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर पाए हैं और अब डिफाल्टर बन चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे उपभोक्ताओं की भी शामिल है, जिनकी बिजली आपूर्ति अभी भी चालू है, जबकि काफी उपभोक्ताओं के कनेक्शन पहले ही काट दिए गए हैं।
57% राशि केवल ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ बकाया
ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की तरफ बकाया लगभग 4,400 करोड़ रुपए है। यह कुल बकाया का करीब 57% है। इस बकाया राशि को निकालना बिजली निगम के लिए काफी मुश्किल हो रहा है। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं का करीब 834 करोड़ रुपए।
कृषि क्षेत्र के किसानों पर 194 करोड़ रुपए का बकाया।
गैर-घरेलू (वाणिज्यिक प्रतिष्ठान) का लगभग 770 करोड़ रुपए।
औद्योगिक इकाइयों का 1,063 करोड़ रुपए से अधिक। सरकारी विभागों का 389 करोड़ रुपए का बकाया है। अन्य श्रेणियों का लगभग 43 करोड़ रुपए बकाया है।
लाचार बिजली निगम
डिफॉल्टर बिजली उपभोक्ताओं को लेकर बिजली निगम लाचारी की स्थिति में है। बिजली बिल न भरने पर पहले जुर्माना और ब्याज लगाया जाता है, इसके बाद कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा वह कोई और अन्य कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। वर्तमान में जो 22 लाख उपभोक्ता डिफाल्टर है उनमें से करीब आधे के कनेक्शन कटे हुए हैं।
योजना के बावजूद नहीं मिल रहा लाभ
बिजली निगम के अधिकारी बताते हैं कि यह योजना पिछले 3 महीने से चल रही है लेकिन इस योजना के बावजूद बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है। जितनी राशि का भुगतान इन पुराने डिफाल्टर बकायेदारों से किसी तरीके से करवाया जा रहा है उससे ज्यादा राशि हर महीने और डिफाल्टर हो जाती है।